उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर: नंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियाँ शुरू
उत्तराखंड की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर, नंदा देवी राजजात यात्रा, जो हर 12 वर्षों में आयोजित होती है, के लिए तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की मुख्यमंत्री ने इस यात्रा को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि यह राज्य की धरोहर है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए देश-विदेश में व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यात्रा मार्ग में बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
नंदा देवी राजजात यात्रा, जिसे ‘हिमालयी महाकुंभ’ भी कहा जाता है, चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होकर लगभग 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद रूपकुंड और होमकुंड तक जाती है। यह यात्रा उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
यात्रा की तैयारियों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और पर्यटन विभाग को समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि यात्रा मार्ग पर साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हों।
उत्तराखंड सरकार की यह पहल नंदा देवी राजजात यात्रा को न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।