माणा हिमस्खलन: तीन बार आया बर्फ का बवंडर, आखिरी तूफान बना तबाही का कारण

शुक्रवार सुबह माणा के पास हिमस्खलन की घटना एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुई। तीसरी बार बर्फ का बवंडर बहुत बड़ा था जिसने सबकुछ तबाह कर दिया। इस आपदा से सुरक्षित निकले श्रमिकों ने उस समय की घटना के बारे में बताया कि एक के बाद एक कुल तीन बार हिमस्खलन हुआ है।

ज्योतिर्मठ सेना के अस्पताल में भर्ती श्रमिक राम कुमार और धीरज ने बताया कि हिमस्खलन की घटना तीन बार हुई है। सबसे पहले साढ़े पांच से छह बजे के बीच हल्का हिमस्खलन हुआ। तब इतनी बड़ी अनहोनी की आशंका नहीं थी। उसके बाद सात बजे के आसपास फिर बर्फ का बवंडर आया जिसमें हम पूरी तरह से दब गए। किसी तरह एक दूसरे की मदद से हम बाहर निकले। लोडर चालक की मदद से हम वहां से निकल गए। जैसे ही हम थोड़ा आगे बढ़े फिर बहुत भयानक हिमस्खलन हो गया। यदि हम वहीं रह जाते तो उसमें बच पाना मुश्किल था।

  • भूल नहीं पाएंगे वह मंजर

हिमस्खलन की चपेट में आकर सुरक्षित निकले श्रमिक उस भयानक मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं। उनके जेहन से वह पल अभी तक निकल नहीं पाया है कि जब अचानक से एक झटके में वे सब बर्फ के अंदर दब गए थे। हिमस्खलन की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस कंटेनर में श्रमिक ठहरे हुए थे वह तहस-नहस हो गए। किसी ने भागकर जान बचाई तो किसी को बचाने के लिए सेना और आईटीबीपी के जवान पहुंच गए।

बर्फ के अंदर दब चुके थे, एक-दूसरे की मदद से निकले

पहले एक हल्का झटका आया। कुछ देर बाद बड़ा झटका आया और हम जिस कंटेनर में ठहरे हुए थे वह तहस-नहस हो गया। हम बर्फ के अंदर दब चुके थे। एक दूसरे की मदद से हम वहां से निकले। हम आठ लोग थे, किसी तरह सेना के खाली कैंप में पहुंचे। अगले दिन जवानों ने हमें वहां से निकाला।

सुखदेव सिंह/गोविंद

हम अपने टिन शेड में थे, अचानक पहाड़ी से बर्फ टूटकर हमारे ऊपर गिर गई। किसी को भागने का मौका नहीं मिला। बर्फ के साथ हम नदी तक पहुंच गए। हमारे कई साथी घायल हो गए। बाद में जवान वहां पहुंचे और हमें कैंप तक लेकर आए।

इंद्रजीत कुमार

10 मिनट हुई थी बात, बोले-होली पर जाऊंगा घर

हिमस्खलन में अकाल मौत का शिकार हुए हाईवे चौड़ीकरण कार्य में जुटी कंपनी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद ने 27 फरवरी की रात माणा गांव के ग्राम प्रधान/प्रशासक पीतांबर मोल्फा से करीब दस मिनट तक मोबाइल पर बात की। हमेशा की तरह वे हंसी मजाक करते रहे। उस बातचीत को याद करते हुए पीतांबर बताते हैं कि अरविंद ने कहा कि प्रधान जी यहां बर्फ जम गई है।

10 मार्च को होली पर घर जा रहा हूं लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। जब 28 फरवरी को उनको माणा में हिमस्खलन की सूचना मिली तो उन्होंने सबसे पहले अरविंद को ही फोन किया, लेकिन तब तक वह बर्फ में दब चुके थे। पीतांबर मोल्फा ने बताया कि अरविंद बेहद हंसमुख और मिलनसार थे। अक्सर उनसे माणा क्षेत्र के बारे में जानकारी लेते रहते थे।

वे बताते हैं कि अरविंद गोकुल धाम, न्यू कॉलोनी, क्लेमेंटटाउन देहरादून निवासी थे माणा से माणा पास हाईवे के चौड़ीकरण कार्य के कारण वह सुबह करीब नौ बजे सीमा क्षेत्र में जाते थे और शाम को बेस कैंप माणा पहुंच जाते थे। 

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