Kedarnath: पंचमुखी उत्सव मूर्ति क्यों है खास? साक्षात शिव की उपस्थिति मानी जाती है, जानिए इससे जुड़ी आस्था और परंपरा
उत्तराखंड स्थित बाबा केदारनाथ धाम हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। लेकिन इस पवित्र धाम की एक और विशेष बात है — बाबा केदार की पंचमुखी उत्सव मूर्ति। यह मूर्ति सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भगवान शिव के पंच स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करती है।
इस पंचमुखी मूर्ति को “उत्सव डोली” के रूप में हर साल शीतकाल के दौरान ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ लाया जाता है, जब मुख्य मंदिर बर्फबारी के कारण बंद हो जाता है। इसी मूर्ति के जरिए श्रद्धालु शीतकाल में भी बाबा के दर्शन कर पाते हैं।
पंचमुखी का अर्थ है — भगवान शिव के पांच चेहरे या रूप:
1. सद्योजात – पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व
2. वामदेव – उत्तर दिशा
3. अघोर – दक्षिण दिशा
4. तत्पुरुष– पूर्व दिशा
5. ईशान – ऊपर की दिशा यानी ब्रह्मांड का केंद्र
इन पांचों मुखों के माध्यम से भगवान शिव सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह के कार्य करते हैं। माना जाता है कि यह उत्सव मूर्ति सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि साक्षात शिव की उपस्थिति मानी जाती है।
हर साल अक्षय तृतीया से पहले यह मूर्ति विशेष पूजा-अर्चना के बाद उखीमठ से केदारनाथ के लिए प्रस्थान करती है। यात्रा मार्ग में पड़ने वाले गांवों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरे रास्ते “जय केदार” के जयकारे गूंजते हैं।
यह मूर्ति सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि केदारनाथ की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक परंपरा का अमिट हिस्सा है