देहरादून झंडा जी मेला: आस्था और श्रद्धा का प्रतीक, कल होगा झंडे जी का आरोहण

देहरादून में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला ऐतिहासिक श्री झंडा जी मेला इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ हो रहा है, जो प्रेम, सद्भाव और आस्था का प्रतीक है। होली के पांचवें दिन से आरंभ होने वाला यह मेला 6 अप्रैल तक चलेगा, जो रामनवमी तक जारी रहेगा।

श्री दरबार साहिब परिसर में मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संगतों के आगमन का सिलसिला तेज हो गया है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार, लाखों श्रद्धालुओं के मेले में शामिल होने की संभावना है।

मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष लंगर प्रसाद की व्यवस्था की गई है, जिसमें तीन बड़े लंगर संचालित होंगे। साथ ही, परिसर में सफाई और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। 42 सीसीटीवी कैमरे, 25 अग्निशमन यंत्र, 35 सुरक्षा गार्ड और 500 स्वयंसेवक विभिन्न व्यवस्थाओं में तैनात रहेंगे। इसके अलावा, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल की मेडिकल टीम और दो एंबुलेंस भी मेले के दौरान उपलब्ध रहेंगी।

हर तीन वर्ष में ध्वज दंड का परिवर्तन होता है। इस बार नया ध्वज दंड दूधली से चयनित साल के पेड़ से बनाया गया है। रविवार, 16 मार्च को संगत नए ध्वज दंड को कंधे पर उठाकर श्री दरबार साहिब लेकर आई। इस यात्रा का नेतृत्व श्री महंत देवेंद्र दास जी ने किया।

ध्वज दंड पर चढ़ाए जाने वाले गिलाफ की सिलाई का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है, जिसमें सेवादार विशेष भूमिका निभा रहे हैं। इस बार दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य राजेंद्र पाल सिंह और सतनाम सिंह को प्राप्त हुआ है।

श्री महंत देवेंद्र दास जी ने सभी श्रद्धालुओं से मेले में अनुशासित और व्यवस्थित रूप से शामिल होने का आग्रह किया है, ताकि मेले की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे।

देहरादून का यह ऐतिहासिक झंडा मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है, जो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एक मंच पर लाता है।