देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में खुलासा किया है कि प्रदेश के 1149 प्राथमिक स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं।
शिक्षकों की कमी और घटती छात्र संख्या
रिपोर्ट के मुताबिक, पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। खासकर चंपावत और रुद्रप्रयाग जिलों में हालात सबसे खराब हैं, जहां न सिर्फ शिक्षकों की संख्या कम है, बल्कि बच्चों की संख्या भी लगातार घट रही है। आयोग ने इसे गंभीर समस्या मानते हुए सरकार से तत्काल कदम उठाने की सिफारिश की है।
स्कूल तो हैं, मगर पढ़ाने वाला कोई नहीं
उत्तराखंड में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने के बावजूद कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, जिससे गांवों में शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। यही वजह है कि कई अभिभावक अपने बच्चों को शहरों के स्कूलों में भेजने लगे हैं, जिससे गांवों से पलायन की समस्या और बढ़ रही है।
सरकार को दिए गए सुझाव
पलायन आयोग ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सरकार को कई सुझाव दिए हैं:
1. शिक्षकों की तैनाती: खाली पड़े स्कूलों में जल्द से जल्द स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति हो।
2. गेस्ट टीचर की भर्ती: जब तक स्थायी भर्ती नहीं होती, तब तक गेस्ट टीचरों की तैनाती की जाए।
3. डिजिटल शिक्षा का विस्तार: पहाड़ी क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा के लिए स्मार्ट क्लास और डिजिटल लर्निंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
4. संयुक्त विद्यालय मॉडल: ऐसे स्कूल, जहां बच्चों की संख्या बहुत कम है, उन्हें आसपास के स्कूलों में मर्ज कर दिया जाए।
5. प्रोत्साहन योजनाएं: दुर्गम क्षेत्रों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष भत्ते और सुविधाएं दी जाएं, ताकि वे वहां जाने के लिए प्रोत्साहित हों।
बढ़ते पलायन की बड़ी वजह
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शिक्षा की बदहाल स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे तेजी से पलायन का एक प्रमुख कारण है। बेहतर शिक्षा की तलाश में लोग अपने गांवों को छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
सरकार की प्रतिक्रिया – राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि वे प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती और अन्य सुधारों के लिए जल्द नीति बनाएंगे।