उत्तराखंड के चमोली जिले की मंडल घाटी से एक अनोखी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहां के दशौली ब्लॉक स्थित बणद्वारा गांव में पंचायत चुनाव के नतीजे रोमांचक मोड़ पर पहुंच गए, जब दो प्रत्याशियों को बराबर वोट मिले। इसके बाद चुनाव का निर्णय टॉस से किया गया, जिसमें 23 वर्षीय नितिन ने जीत दर्ज कर ली। इस तरह नितिन मंडल घाटी के सबसे कम उम्र के ग्राम प्रधान बन गए हैं।
चुनाव में नितिन और उनके प्रतिद्वंदी रविन्द्र दोनों को 138-138 वोट मिले। नियमों के तहत जब दो प्रत्याशियों को समान संख्या में वोट मिलते हैं और कोई भी स्पष्ट विजेता नहीं निकलता, तो फैसला टॉस के जरिए किया जाता है। पंचायत प्रतिनिधियों और निर्वाचन अधिकारियों की मौजूदगी में टॉस कराया गया, जिसमें नितिन विजयी घोषित हुए।
नितिन की जीत सिर्फ एक संयोग नहीं बल्कि युवा नेतृत्व की ओर एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। गांव के लोगों ने भी इस निर्णय का खुले दिल से स्वागत किया है। खास बात यह है कि नितिन ने युवाओं को ग्राम विकास से जोड़ने और पारदर्शी शासन देने का वादा किया है।
ग्राम प्रधान बनने के बाद नितिन ने कहा कि वह गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, और स्वरोजगार को प्राथमिकता देंगे। साथ ही युवाओं को पंचायत स्तर पर जागरूक कर शासन व्यवस्था में भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के कई पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है। यह घटना न केवल लोकतंत्र की जीवंतता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अब युवा भी स्थानीय नेतृत्व की कमान संभालने को तैयार हैं। बणद्वारा गांव के इस चुनाव ने दिखा दिया कि लोकतंत्र में नतीजे सिर्फ वोटों से ही नहीं, बल्कि भाग्य से भी तय हो सकते हैं — और यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।