Uttarakhand: भारत के पांच प्रमुख पीठों में श्रेष्ठ है केदारनाथ का हिमवत वैराग्य पीठ, पिंडदान-तर्पण का है गहरा आध्यात्मिक महत्व
उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम न केवल चारधाम यात्रा का प्रमुख केंद्र है, बल्कि इसे भारत के पांच पवित्र पीठों (शक्तिपीठों) में से एक — ‘हिमवत वैराग्य पीठ’ के रूप में भी जाना जाता है।
यह पीठ भगवान शिव की तपस्थली मानी जाती है, जहाँ आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग प्रशस्त होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आदि शंकराचार्य ने भारत को पांच प्रमुख पीठों में विभाजित किया था —
श्रृंगेरी (ज्ञान), द्वारका (धर्म), पुरी (यश), ज्योतिष (संपत्ति) केदारनाथ (वैराग्य)।
इनमें हिमवत वैराग्य पीठ अर्थात केदारनाथ सन्यास और मोक्ष की सिद्ध भूमि मानी जाती है।
यहां आने वाले श्रद्धालु पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म भी करते हैं। मान्यता है कि केदारनाथ में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृदोष का शमन होता है। विशेषकर श्रावण और पितृ पक्ष में यहां हजारों श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त पूजा करते हैं।
धाम में आने वाला हर यात्री वैराग्य की अनुभूति लेकर लौटता है। बर्फ से ढकी चोटियों के बीच स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
11वें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजित केदारनाथ में दर्शन मात्र से जीवन के पाप कट जाते हैं, ऐसी आस्था है।
वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने विशेष तर्पण घाट और कर्मकांड स्थलों की व्यवस्था की है, ताकि श्रद्धालु पिंडदान एवं पूजा विधि ठीक ढंग से कर सकें।