सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर नहीं आये काम, यूटूबर दीपा नेगी हारीं ग्राम प्रधान चुनाव

सोशल मीडिया पर नाम कमाने वाले हर व्यक्ति की पहचान जरूरी नहीं कि गांव की ज़मीन पर भी कायम रह सके। ऐसा ही एक उदाहरण उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले की ग्राम पंचायत घिमतोली से सामने आया, जहां लाखों यूट्यूब सब्सक्राइबर और हजारों इंस्टाग्राम व फेसबुक फॉलोअर्स वाली यूटूबर दीपा नेगी ग्राम प्रधान का चुनाव हार गईं।

दीपा नेगी को ग्राम प्रधान चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी कविता देवी ने हराया। कविता देवी ने सीधे तौर पर ग्रामीण विकास और सेवा से जुड़ाव को प्राथमिकता दी, वहीं दीपा नेगी के सोशल मीडिया प्रभाव को ग्रामीणों ने नकार दिया।

चुनाव परिणाम के बाद यह साफ हो गया कि गांव की जनता को प्रचार-प्रसार से अधिक जमीन से जुड़े कार्य और व्यवहारिकता पसंद है। गांव के कई बुजुर्गों और युवाओं ने कहा कि सब्सक्राइबर कितने हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता, असली बात यह है कि गांव में आपका व्यवहार कैसा है और आप गांव के काम कब आते हैं। कई ग्रामीणों ने चुनाव परिणाम को लेकर अपनी राय में कहा कि सोशल मीडिया पर चाहे जितनी लोकप्रियता क्यों न हो, गांव में वह इंसान ज्यादा महत्वपूर्ण होता है जो हर जरूरत पर साथ खड़ा हो।

दीपा नेगी ने परिणाम के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन चुनावी हार ने एक बार फिर साबित किया कि डिजिटल दुनिया और असली दुनिया के मानदंड अलग होते हैं।

ग्राम पंचायत घिमतोली में कविता देवी की जीत के साथ अब ग्रामीणों को स्थानीय विकास, पारदर्शी शासन और जरूरतों की पूर्ति की नई उम्मीद बंधी है।